शरद एक तड़ीपार कार थीफ था जो कि ब्रम्हा नाम के एक बड़े बिजनेसमैन की ओट में स्मगलर के लिये काम करता था । खुद को भगवान मानने वाले ब्रम्हा ने अपनी ‘प्रजा’ शरद को एक और साधारण बिजनिस ट्रिप पर नेपाल भेजा ! एक ऐसी ट्रिप जैसी कि शरद पहले भी इक्कीस बार कर चुका था और जिसे वो सामान्य रोजमर्रा की ट्रिप बतलाता था । लेकिन क्या ये ट्रिप भी पिछली इक्कीस ट्रिप जैसी सामान्य थी ?
Surender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.
तड़ीपार सुरेन्द्र मोहन पाठक की थ्रिलर श्रृंखला का उपन्यास है जो कि 1993 में प्रथम बार प्रकाशित हुआ था।
उपन्यास एक तड़ीपार व्यक्ति शरद शुक्ला की कहानी है। शरद शुक्ला तड़ीपार होकर जब बरेली से पटना आया तो ब्रह्मा नाम के व्यक्ति के लिए तस्करी करने लगा था। उपन्यास की कहानी उसके इसी तस्करी के आखिरी फेरे को केंद्र में रखकर लिखी गयी है।
उपन्यास शुरुआत से ही अपनी पकड़ पाठक पर बनाते हुए चलता है। जैसे जैसे उपन्यास आगे बढ़ता जाता है वैसे वैसे उपन्यास में रहस्य जुड़ते जाते हैं। एक रहस्य खुलता है तो दो उसकी जगह ले लेते हैं जो कि आपको कथानक से बाँध कर रखते हैं।
उपन्यास के प्रति मेरे विस्तृत विचार आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं: तड़ीपार
लेखक ने नेपाल के तख्तापलट और राजनीति को लेकर कहानी लिखी है जिसमे हीरे, शरद और ब्रह्मा का अहम किरदार है.
लेकिन कहानी जरुरत से ज्यादा slow pace है और content भी कुछ interesting नहीं है. बार-बार नींद के झटके महसूस किये मैंने. Smpji के दीवाने पसंद करेंगे, मेरे तो बस की बात नहीं 👎👎👎