Hindi and Regional Languages Literature discussion

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विचार-विमर्श

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विकास नैनवाल | 53 comments इस हिस्से में इस ग्रुप के सदस्य किसी भी विषय में ऊपर बात चीत कर सकते हैं।


विकास नैनवाल | 53 comments चन्दन पाण्डेय जी का कहानी संग्रह इश्क़फरेब पढ़ना शुरू किया है। किताब पेंगुइन से प्रकाशित की गयी है। किताब को खोलते ही लगता है कि इसके साथ कितना अन्याय हुआ है। कागज़ की गुणवत्ता निम्न स्तर की है। पहले जब किताब मिली तो लगा कि अमेज़न वालों ने पायरेटेड कॉपी थमा दी लेकिन फिर रेविएव्स में जाना उन्होंने ऐसे ही कागज़ का उपयोग किया है। यही हाल सुधा मूर्ती जी के उपन्यास महाश्वेता का था। वो भी पेंगुइन द्वारा ही प्रकाशित थी। क्या ये हालत केवल भारतीय उपन्यासकारों कि रचनाओं की है?


message 3: by [deleted user] (new)

आश्चर्य है. मेरी पुस्तक भी पेंगुइन से छपी है और उसकी पेपर और प्रिंट क्वालिटी काफी अच्छी है. पेंगुइन के प्राइस वैसे भी ज़्यादा होते हैं. यदि पेपर क्वालिटी भी अच्छी न हो तो पाठक मिलने में कठनाई होगी.


विकास नैनवाल | 53 comments जी,आपकी पुस्तक कि गुणवत्ता अच्छी थी। इन पुस्तकों कि कीमत १५० रूपये थी इसलिए शायद इनकी गुणवत्ता कम हो। मुझे भी पुस्तक पाकर ताज्जुब हुआ था।


message 5: by [deleted user] (new)

युवा साहित्य में प्रकाशित मेरा इंटरव्यू -

हिंदी को अच्छे रोचक साहित्य की बहुत ज़रुरत है-संदीप नैयर

http://yuvasahitya.com/%e0%a4%b9%e0%a...


विकास नैनवाल | 53 comments अच्छा साक्षात्कार। आपकी इस बात से मैं भी इत्तेफाक रखता हूँ कि हिंदी में रोचक कृतियों की आवश्यकता है। इसके इलावा हिंदी साहित्य को अपनी सीमा बढ़ानी पड़ेगी। हिंदी में अभी भी हॉरर और साइंस फिक्शन की रचनायें नहीं आती हैं। ऐतिहासिक रचनायें, सामजिक रचनायें और जासूसी रचनायें ही मिलती हैं। ऐसे में जिन पाठकों को हॉरर पसंद है वो स्टेफेन किंग, पीटर स्त्रौब, डीन कूंटज़ जैसे लेखकों के तरफ जाते हैं। दूसरी बात हिंदी में पुरूस्कार भी कम हैं और जो हैं वो 'साहित्य' के लिए हैं। अलग श्रेणी के उपन्यासों (जासूसी, हॉरर) के लिए पुरूस्कार ही होते हैं जिससे लेखकों का उत्साह वर्धन नहीं होता।


message 7: by [deleted user] (new)

विकास आपका कहना सही है कि हिंदी में विविधता का अभाव है. मगर यह समस्या सिर्फ हिंदी की ही नहीं बल्कि भारतीय साहित्य की है. अंग्रेजी में भी भारतीय लेखक गिने चुने विषयों पर ही लिखते हैं. हॉरर और साइंस फिक्शन भारतीय साहित्य में बड़ी मुश्किल से ही मिलेंगे.
हिंदी में पुरस्कारों की तो बात ही छोड़ दें. वे तो बेहद गुटबाजी और राजनीति के शिकार हैं. आलोचकों और पुरस्कार समितियों ने हिंदी साहित्य का सबसे अधिक नुकसान किया है. इन्हें पॉपुलर फिक्शन से दूर रखने में ही भलाई है.


विकास नैनवाल | 53 comments आजकल यू ट्यूब में किताबनामा नाम का सीरियल देख रहा हूँ। जैसे की नाम से ही पता चलता है की यह सीरियल किताबों की दुनिया से जुड़ा हुआ है। यहाँ साहित्य, किताबें और उनसे जुड़े कई पहलुओं पर साहित्यकारों के साथ चर्चा होती है। मेरे हिसाब से नमिता गोखले जी ने एक काफी अच्छी कोशिश की है। यहाँ पहले एपिसोड का लिंक दे रहा हूँ, अगर आप साहित्य में रूचि रखते हैं तो आपको ये श्रृंखला ज़रूर पसंद आएगी
https://www.youtube.com/watch?v=v3eID...


message 9: by [deleted user] (last edited Sep 02, 2015 12:43PM) (new)

फेमिना ने वर्ष २०१४-१५ की हिंदी की बेहतरीन किताबों की सूची निकाली है और उसमें उपन्यास की विधा में समरसिद्धा को तीसरा स्थान दिया है. यह मेरे लिए बड़े ही हर्ष और गौरव की बात है. फेमिना के पैनलिस्ट समरसिद्धा की समीक्षा करते हुए लिखते हैं -

"वैसे तो यह पौराणिक पृष्ठभूमि की कथा है लेकिन इसके बारीक कथान्तु आज के समय की नसों में भीतर तक पैबस्त हैं........इसकी उपकथा में नक्सलवाद की परछाइयाँ हैं"
विमल चन्द्र पाण्डेय


"आठवीं शताब्दी ईसापूर्व की इस काल्पनिक प्रेमकथा के माध्यम से लेखक ने तत्कालीन सामजिक-राजनैतिक परिस्थितियों को सजीव करने की सफल चेष्टा की है. पात्रों का चरित्र चित्रण जिस कौशल और बारीकी से किया गया है उसने एक पुरानी और कल्पनाप्रधान प्रेम कहानी को जीवंत बना दिया है......"
अमिताभ श्रीवास्तव


message 10: by [deleted user] (new)

सत्य व्यास के नए उपन्यास 'दिल्ली दरबार' की मेरी लिखी समीक्षा.

http://kitabibaaten.blogspot.co.uk/20...


message 11: by Sanjay (new)

Sanjay Agnihotri | 5 comments दोस्तों
मैं एक उपन्यासकार हूँ मेरे प्रथम प्रकाशित उपन्यास https://www.goodreads.com/topic/list_... के विषय मे मित्रों, कुछ पाठकों व समीक्षकों ने विचार व्यक्त किया है कि ये उपन्यास, नाम से (जो दिल की तमन्ना है), साहित्यक कृति लगता है पर दर असल थ्रिलर है । मैं इस बारे मे आपलोगों के भी विचार जानना चाहता हूँ ?
https://www.amazon.in/jo-dil-ki-taman...


message 12: by Ashish (new)

Ashish Dalal | 2 comments Hi,

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