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महाभिषग
महाभिषग शीर्षक से ही स्पष्ट है कि यह गौतम बुद्ध के जीवन पर आधारित उपन्यास है न कि भगवान बुद्ध के । बुद्ध को भगवान बनानेवाले उस महान उद्देश्य से ही विचलित हो गए थे, जिसे लेकर बुद्ध ने अपना महान सामाजिक प्रयोग किया था और यह सन्देश दिया था कि जाति या जन्म के कारण कोई किसी अन्य से श्रेष्ठ नहीं है और कोई भी व्यक्ति यदि संकल्प कर ले और जीवन–मरण का प्रश्न बनाकर इस बात पर जुट जाए तो वह भी बुद्ध हो सकता है । महाभिषग इस क्रान्तिकारी द्रष्टा के ऊपर पड़े देववादी खोल को उतारकर उनके मानवीय चरित्र को ही सामने नहीं लाता, यह देववाद के महान गायक अश्वघोष को भी एक पात्र बनाकर सिर के बल खड़ा करने का और देववाद की सीमाओं को उजागर करने का प्रयत्न करता है । इतिहास की मार्मिक व्याख्या वर्तमान पर कितनी सार्थक टिप्पणी बन सकती है, इस दृष्टि से भी यह एक नया प्रयोग है।
206 pages, Paperback
First published January 1, 2014
About the author
भगवान सिंह [Bhagwan Singh]
36 books22 followersभगवान सिंह का जन्म, 1 जुलाई 1931 गोरखपुर जनपद के एक मध्यवित्त किसान परिवार में। गोरखपुर विश्व विद्यालय से एम. ए. (हिंदी) । आरंभिक लेखन सर्जनात्मक कविता, कहानी, उपन्यास और आलोचना। 1968 में भारत की सभी भाषाओं को सीखने के क्रम में भाषाविज्ञान और इतिहास की प्रचलित मान्यताओं से अनमेल सामग्री का प्रभावशाली मात्रा में पता चलने पर इसकी छानबीन के लिए स्थान नामों का भाषावैज्ञानिक अध्ययन, अंशतः प्रकाशित, नागरीप्रचारिणी पत्रिका,(1973)। इसके बाद मुख्य रुचि भाषा और इतिहास के क्षेत्र में अनुसंधान में और सर्जनात्मक लेखन प्रासंगिक हो गया। इसके बाद के शोधग्रंथों में हड़प्पा सभ्यता और वैदिक साहित्य, दो खंडों में, (1987) राधाकृष्ण प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली; दि वेदिक हड़प्पन्स,(1995), आदित्य प्रकाशन, एफ 14/65, मॉडल टाउन द्वितीय, दिल्ली- 110009; भारत तब से अब तक(1996) शब्दकार प्रकाशन, अंगद नगर, दिल्ली-92, (संप्रति) किताबघर प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली; भारतीय सभ्यता की निर्मिति (2004) इतिहासबोध प्रकाशन, इलाहाबाद; प्राचीन भारत के इतिहासकार, सस्ता साहित्य मंडल, नई दिल्ली,(2011); कोसंबीः कल्पना से यथार्थ तक, आर्यन बुक्स इंटरनेशनल, नई दिल्ली,(2011); आर्य- द्रविड़ भाषाओं का अंतः संबंध, सस्ता साहित्य मण्डल (2013); भाषा और इतिहास,(प्रकाश्य)। संप्रति ऋग्वेद का सांस्कृतिक दाय पर काम कर रहे हैं।
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