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मुझे चाँद चाहिए Mujhe Chand Chahiye
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मुझे चाँद चाहिए Mujhe Chand Chahiye

4.20  ·  Rating details ·  158 ratings  ·  19 reviews
कई दशकों से हिन्दी उपन्यास में छाये ठोस सन्नाटे को तोड़ने वाली कृति आपके हाथों में है, जिसे सुधी पाठकों ने भी हाथों-हाथ लिया है और मान्य आलोचकों ने भी !
शाहजहाँपुर के अभाव-जर्जर, पुरातनपंथी ब्राह्मण-परिवार में जन्मी वर्षा वशिष्ठ बी.ए. के पहले साल में अचानक एक नाटक में अभिनय करती है और उसके जीवन की दिशा बदल जाती है। आत्माभिव्यक्ति के संतोष की यह ललक उसे शाहजहाँनाबाद के नेशनल
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Paperback
Published by Radhakrishna Prakashan (first published 1993)
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Manish Kumar
Jul 03, 2013 rated it liked it
इस उपन्यास में सुरेंद्र वर्मा ने समाज, रंगमंच और सिने जगत से जुड़े विभिन्न पहलुओं को छूने की कोशिश की है। जब वो रंगमच से जुड़ी बारीकियों को विश्लेषित करते हैं तो उनकी लेखनी सबसे सशक्त जान पड़ती है। शायद ये इसलिए भी है कि रंगमंच उनका कार्यक्षेत्र रहा है। सुरेंद्र वर्मा ने रंगमंच के जिस परिदृश्य को उभारा है वो आज भी बहुत कुछ वैसा ही है। कितने ही नौजवान और नवयुवतियाँ, देश के कोने कोने से राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में आते हैं तो इस जोश और समर्पण के साथ कि कला के इस माध्यम में अपनी चुनी हुई विधा में व ...more
Nidhi Jha dua
Nov 26, 2013 rated it it was amazing  ·  review of another edition
I loved this book for many reasons. The major quotient can be the strong feminist approach that has been shown.
This book is all about the struggle of a girl hailing from a small town and who has led entire life on her on terms and conditions. Her exotic way of living was unbearable for his kith and kins and they never stood for her. All she had was few friends who showed her the way, to whom she dedicated her life and the most important one she was always high on morals and attached to ground. S
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Ankita Chauhan
Apr 25, 2019 rated it it was amazing  ·  review of another edition
Remarkable piece of hindi literature.
Priya
Oct 05, 2015 rated it really liked it  ·  review of another edition
This book gives adrenaline rush. so much so that I missed some important appointments to finish it. I wonder why there is no bollywood movie on it yet. After really long I read a fat book with reasonably tough hindi. I struggled in the begining but emotional stir it created compelled me to finish 515 pages in no time.

Varsha Vashisht,a girl from tier 3 Indian city reaches the stardom in Mumbai. Her life is an intersting tapestry depicting struggle,indomitable success and strong feminism in a subt
...more
Kumar Harsh
Aug 10, 2018 rated it it was amazing
कोई लेखक किसी चरित्र को इनती संजिन्दगी और बारीकी से लिखे देता है की आश्चर्य होता है कोई इतना कैसे सोच सकता है, अगर उसने लिखा इतना है तो सोचा कितना होगा. 'वर्षा वशिष्ठ' को इसी तरह गढ़ा गया है इस पुस्तक में. कहानी इतनी विस्तार में की कुछ भी नाटकीय या अचानक सा होता प्रतीत नहीं होता. सब कुछ जैसे स्वाभाविक गति से चल रही हो...जैसे अपनी जीवन की गति हो. महान कृतियों के सन्दर्भों का अद्भूत समिश्रण, निश्चय ही लेखक ने काफी रिसर्च किआ होगा. मानव को मानव की जरुरत और उनके संबंधों को रेखांकित करती हुई, विपरीत ...more
Kumar Pankaj Panchal
रंगमच प्रेमी के लिए बहतेरिन रचना है। हर एक प्रकरण कुछ ना कुछ सीखा जाता है। ५१४ पन्नो की यह रचना आप को अपने साथ बांधे रखती है। हालांकि कुछ दृश्यो मे इतने अधिक पात्र हो जाते है की पात्रो को संभालना मुशकिल हो जाता है। परंतु दृश्य यथार्थ के नजदीक रहे उसके लिए ऐसा करना अनिवार्य भी है। अंत मे नायक का न रहना व नायिका की अंतरंग मित्र का भी अंतिम सत्य की और अगर्सर होना नायिका की भावनात्मक स्थिति को अंतिम छोर तक ले जाती है।
Swaraj Yadav
Apr 25, 2016 rated it it was amazing  ·  review of another edition
I was in college .. missed one exam for it .. was totally worth it :) .. thanks mudit chandra ...indebted forever for this gem.
Kirtida Gautam
This is the first novel I have read in my life. For the longest time, I could not enjoy any other novel because the kind of emotional reaction I had for this work, no other work could produce in me.
Rashmi Verma
Sep 07, 2019 marked it as to-read
This review has been hidden because it contains spoilers. To view it, click here.
Shubhangi
Jan 23, 2019 rated it it was amazing  ·  review of another edition
Shelves: hindi-gems
A milestone in Hindi literature.
Ved Prakash
Dec 02, 2018 rated it really liked it
छोटे शहर का मध्यमवर्गीय समाज, थिएटर और फ़िल्म जगत की दुनिया : तीनों के अंदर के जीवन को सजीवता से चित्रित करते इस उपन्यास के मुख्य पात्र का नाम है .....

***

"तुमने अपना नाम बदल लिया है ?"

"हाँ।"

"काहे?"

"मुझे अपना पसंद नाम नहीं था। अगर हाई स्कूल में नहीं बदलती, तो आगे चलकर बहुत मुश्किल होती। अख़बार में छपवाना पड़ता।"

"तुम्हारे नाम में क्या खराबी है ?" पिता ने कड़वे स्वर में पूछा।

"अब हर तीसरे-चौथे के नाम में शर्मा लगा होता है। मेरे क्लास में ही सात शर्मा है। ... और यशोदा ? घिसा-पिटा, दकियानूसी नाम। उन्ह
...more
Neha Sharma
Jul 18, 2016 rated it really liked it
"कुछ झीना अवसाद..थोड़ा गुनगुना पछतावा और अपने आप पर तनिक झिझक-सा संदेह..आयु के एक पड़ाव तक पहुँचने पर कुछ रचनालीन,संवेदनशील व्यक्ति भीतरी ख़ालीपन,हल्के आक्रोश और बेचैन करने वाली अर्थहीनता से जूझने लगते हैं-खासकर शो बिज़नेस से जुड़े हुए लोग,क्योंकि चुनौतियाँ,तनाव और दर्द भरे विरोधाभास उनके आसपास बहुत हैं ।"

'मुझे चाँद चाहिए' सुरेन्द्र वर्मा का प्रसिद्ध उपन्यास है..जिसमें छोटे शहर की लड़की वर्षा वशिष्ठ की जीवन यात्रा है..किस तरह एक ब्राह्मण परिवार में जन्मी..अपने अस्तित्व से अनजान वर्षा को रंगमंच
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Piyush Bhatia
Jul 02, 2019 rated it it was amazing
शक्ति तब तक सम्पूर्ण नहीं होति, जब तक अपनी काली नियति के आगे आत्मसमर्पण न कर दिया जाये | हिंदी का यह उपन्यास रोमन सम्राट कालीगुला द्वारा कही गयी इस बात को बेहद सटीक एवं तार्किक रूप से सिद्ध करता है |

यह एक अपरिवर्तनवादी परिवार में जन्मी बच्ची, सिलबिल, की कहानी है जो अपनी काबिलियत के बलबूते अपने सपनों को पूरा करना चाहती है, पर उसके रूढ़िवादी परिवार का एकमात्र मकसद उसकी शादी कराना है |

साधारण सी दिखने वाली इस किशोरी में प्रतिभा का भंडार है, पर बाहरी दुनिया का अनावरण न होने के कारण उसे अपनी क्षमता का
...more
Ankita Jain
Apr 10, 2019 rated it it was amazing
किताब जो हफ़्तों दिनों तक मेरे भीतर ज़िंदा रही
Fauziya
Jan 14, 2014 rated it really liked it
Inspiring and Super-Creative.
Kunjan Gandhi
This novel is excellent
Khileshwar
Oct 28, 2014 rated it it was amazing
very good
Shwetha H.S.
Feb 25, 2015 rated it it was amazing
For a detailed review of this book, click on this link
https://wereadthattoo.wordpress.com/2...
...more
Ratnu Ashok
rated it it was amazing
Jan 12, 2019
Niti
rated it did not like it
Jan 21, 2014
Raziv Raaz
rated it it was amazing
Aug 19, 2019
Krishna Gopal
rated it it was amazing
Sep 08, 2015
sadhna jain
rated it really liked it
Mar 15, 2017
Rajesh Rahgir
rated it it was amazing
Apr 28, 2015
DEVENDERA MAURYA
rated it it was amazing
Feb 23, 2020
Kalyani Gandhi
rated it it was amazing
Feb 17, 2016
Sunil Kumar
rated it it was amazing
Aug 18, 2014
Pawan Mahala
rated it liked it
May 09, 2017
Manju Sharma
rated it it was amazing
Apr 23, 2018
Ummehani
rated it it was amazing
Jan 07, 2018
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शिक्षा: भाषाविज्ञान में एम.ए.।

प्रकाशित कृतियाँ:

उपन्यास: अँधेरे से परे, मुझे चाँद चाहिए, दो मुर्दांे के लिए गुलदस्ता।

कहानी-संग्रह: प्यार की बातें, कितना सुन्दर जोड़ा।

व्यंग्य-संग्रह: जहाँ बारिश नहीं।

नाटक: तीन नाटक, सूर्य की अन्तिम किरण से सूर्य की पहली किरण तक, आठवाँ सर्ग, छोटे सैयद बड़े सैयद, शकुन्तला की अँगूठी, एक दूनी एक, कश्ैद-ए-हयात तथा नींद क्यों रात-भर नहीं आती।

सम्मान: केन्द्रीय संगीत नाटक अका
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