दीवानचन्द एक ऑटोमोबाइल कम्पनी का मैनेजर था जिसे अपनी काम के सिलसिले में अक्सर राजनगर से बाहर जाना पड़ता था । ऐसे ही एक टूर के बाद एक सुबह उसे चिट्ठी मिली जिसमें उस पर इल्जाम लगाया गया था कि अपने पिछले टूर के दौरान उसने एक मासूम लड़की की जिंदगी तबाह डाली थी और उसकी सारी कारगुजारियों का कच्चा चिट्ठा उसकी बीवी के सामने खोल देने की धमकी दी गयी थी । जबकि खुद दीवानचंद का दावा था कि उसने कुछ गलत नहीं किया था ।
Surender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.
2.5 स्टार ब्लैकमेलर की हत्या....... कौन ब्लैकमेलर.... क्यों ब्लैकमेलर
सुनील सीरीज की पाँचवी किताब. नाम इंटरस्टिंग हैँ पर किताब भी हैँ क़्या? दूसरी किताब के बाद क्लाइंट बेस्ड स्टोरी सामने आती हैँ. दीवानचंद नाम का बिज़नेस मैन जिसने हाल ही में फ़ास्ट मोटर कार बनायी थी आता हैँ और दास्तां बयान करता हैँ की पिछली रात पार्टी में मगन भाई की लगाई लड़की सोनिया के साथ रात गुजारी थी और अब कोई उसे तस्वीर से ब्लैकमेल कर रहा था सुनील सोनिया तक पंहुचा फिर उसी मकान में रह रहे बिहारी तक फिर चंद्रशेखर तक जो सोनिया का पति बिहारी का साला था सुनील दीवानचंद के साथ विश्वनगर पंहुचा था जँहा चन्दरशेखर मरा पड़ा था सुनील आगे लाश से चाबी निकाल कर उसके घर पहुंच डायरी और ब्लैकमेलीग पत्र को अटैची में रख स्टेशन के लाकर में रख देता हैँ आगे की कहानी गोल गोल घूमती हैँ जैसे सोनिया फालतू में चन्दरशेखर को डराती हैँ और वह ब्लैकमेलिंग छोड़ कर भाग खड़ा हुआ. सोनिया उसे मारा पाती हैँ और डायरी उसके घर में रखने चली जाती हैँ जबकि चन्दर ने उसे लेटर लाने के लिए कहा था दिवानचंद पहले ही विश्वनगर जा चूका था चंद्र को मृत पा चूक भी दुबारा सुनील के साथ जाता हैँ और सुनील का दीवान की पत्नी का निर्मला का कातिल ठहराना बेसिर पैर ऐसे ही लगा जैसे क्लिमैक्स में सुनील के लाकर का सामान लेने बिहारी का जाना और उसी बेस पर कातिल ठरना आखिर क्यूँ? इस नॉवेल में पहली बार फीलर महसूस हुआ पने भरने के लिए कहानी गोल गोल जलेबी बनायीं गयी हैँ अभी तक पाठक जी सुधीर का गठन नहीं किया था इसकी किस्म ने ही सुधीर को गडा होगा सुनील लड़कियों से घिरा रहता हैँ सभी उसके लिए लड़ती रिझाती रहती हैँ सोनिया जानकी निर्मला और पर्मिला तो पुरे सबाब पर हैँ सवेंदनशिलता में ये नॉवेल पूरी तरह से नाकाम हैँ पॉइंट बस इतना सा हैँ कि इन्वेस्टीगेटिव नरेशन हैँ जो पिछले दो नॉवेल में गायब था
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